Assembly Election Result 2021 Caa Failed To Hurt Bjp, Congress Don’t Benefit By Opposing It – असम चुनाव: सीएए विरोध के बाद भी भाजपा का कमाल, लगातार दूसरी बार खिला कमल

[ad_1]

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिसपुर
Published by: स्वाति सिंह
Updated Sun, 02 May 2021 10:21 PM IST

सार

असम में पहली बार कोई गैर कांग्रेस सरकार लगातार दूसरी बार सत्ता में आ रही है। असम में विपक्षी दलों के महाजोत के मुकाबले बीजेपी की अगुवाई वाला गठबंधन (मित्रजोत) सत्ता में वापसी करता दिख रहा है।

सर्बानंद सोनोवाल
– फोटो : facebook.com/SarbanandaSonowal

ख़बर सुनें

असम में बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ चुनावी किला फतह करने में कामयाब रही।  इसके साथ ही वो कारनामा किया जो राज्य में कभी भी कोई गैर कांग्रेस सरकार नहीं कर पाई। दरअसल, असम में पहली बार कोई गैर कांग्रेस सरकार लगातार दूसरी बार सत्ता में आ रही है। असम में विपक्षी दलों के महाजोत के मुकाबले बीजेपी की अगुवाई वाला गठबंधन (मित्रजोत) सत्ता में वापसी करता दिख रहा है।  इस गठबंधन में असम गण परिषद और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल शामिल थे।  

वहीं असम में बीजेपी की अगुवाई वाली राजग एक बार फिर से सरकार बनाने की स्थिति में नजर आ रहा है। असम की विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं, जिसमें से सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 64 है। रुझानों के हिसाब से एनडीए गठबंधन आसानी से इस आंकड़े को पार करता हुआ दिखाई दे रहा है। वहीं, चुनाव आयोग के आंकड़े के अनुसार, बीजेपी अभी 60 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस को 26 सीटों पर बढ़त है। असम गण परिषण 11 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट 11 सीटों पर आगे है।

नहीं दिखा सीएए विरोध का असर 
बता दें कि मोदी सरकार का नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर असम में काफी विरोध हुआ था।  हालांकि, विधानसभा चुनाव में हुई वोटिंग में इस विरोध का कोई खास असर नहीं दिखा है।  ना ही सीएए का मुद्दा उठाने वाली कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसका कोई खास राजनीतिक फायदा उठा पाए हैं।  

इस बार असम के छोटे समुदायों में भी बीजेपी अपनी पकड़ बनाती दिखी है। इन समुदायों में मोरान, मिसिंग, राभा और देवरी शामिल हैं। याद दिला दें कि असम सरकार और खासतौर पर स्वास्थ्य मंत्री हिमंता बिस्वा सर्मा की कोरोना महामारी की परिस्थितियों को संभालने को लेकर काफी तारीफ हुई।  हालांकि, इस वजह को एनडीए की जीत का श्रेय दिया जा सकता है।  इसके अलावा दो बड़े स्थानीय चेहरों सर्बानंद सोनोवाल और हिमंता बिस्वा सरमा ने भाजपा को इस बार के चुनाव में सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।  

असम के नतीजों को लेकर मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा है कि असम में रुझानों में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है। हम निश्चित ही फिर से सत्ता में आएंगे। असम में मुख्य उम्मीदवार मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्व सरमा, एजीपी प्रमुख एवं मंत्री अतुल बोरा आदि हैं। इसके अलावा कांग्रेस विधायक दल के प्रमुख देबब्रत साइकिया और उनके सहायक रकीबुल हुसैन भी प्रमुख उम्मीदवार हैं।

बता दें कि असम में पहली बार गैर कांग्रेस सरकार 1978 में बनी थी, जब जनता पार्टी सत्ता में आई।  लेकिन 18 माह में अंदरूनी गुटबाजी के कारण गोलप बोरबोरा की सरकार गिर गई। असमिया आंदोलन को लेकर राज्य में 1985 और 1996 के बीच राज्य में असम गण परिषद की सरकार बनी, लेकिन वो भी लगातार सत्ता में नहीं रही।  वर्ष 2001 से 2016 तक लगातार असम में तरुण गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार रही।  

असम लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे 
असम की 14 लोकसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने सात सीटों पर जीत हासिल की है जबकि कांग्रेस को महज तीन सीटें मिली। वहीं एआईयूडीएफ को तीन सीटें और एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी के खाते में गई। राज्य में कुल 14 लोकसभा सीटों के लिए शुरुआती 3 चरणों में वोट डाले गए थे।

विस्तार

असम में बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ चुनावी किला फतह करने में कामयाब रही।  इसके साथ ही वो कारनामा किया जो राज्य में कभी भी कोई गैर कांग्रेस सरकार नहीं कर पाई। दरअसल, असम में पहली बार कोई गैर कांग्रेस सरकार लगातार दूसरी बार सत्ता में आ रही है। असम में विपक्षी दलों के महाजोत के मुकाबले बीजेपी की अगुवाई वाला गठबंधन (मित्रजोत) सत्ता में वापसी करता दिख रहा है।  इस गठबंधन में असम गण परिषद और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल शामिल थे।  

वहीं असम में बीजेपी की अगुवाई वाली राजग एक बार फिर से सरकार बनाने की स्थिति में नजर आ रहा है। असम की विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं, जिसमें से सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 64 है। रुझानों के हिसाब से एनडीए गठबंधन आसानी से इस आंकड़े को पार करता हुआ दिखाई दे रहा है। वहीं, चुनाव आयोग के आंकड़े के अनुसार, बीजेपी अभी 60 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस को 26 सीटों पर बढ़त है। असम गण परिषण 11 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट 11 सीटों पर आगे है।

नहीं दिखा सीएए विरोध का असर 

बता दें कि मोदी सरकार का नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर असम में काफी विरोध हुआ था।  हालांकि, विधानसभा चुनाव में हुई वोटिंग में इस विरोध का कोई खास असर नहीं दिखा है।  ना ही सीएए का मुद्दा उठाने वाली कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसका कोई खास राजनीतिक फायदा उठा पाए हैं।  

इस बार असम के छोटे समुदायों में भी बीजेपी अपनी पकड़ बनाती दिखी है। इन समुदायों में मोरान, मिसिंग, राभा और देवरी शामिल हैं। याद दिला दें कि असम सरकार और खासतौर पर स्वास्थ्य मंत्री हिमंता बिस्वा सर्मा की कोरोना महामारी की परिस्थितियों को संभालने को लेकर काफी तारीफ हुई।  हालांकि, इस वजह को एनडीए की जीत का श्रेय दिया जा सकता है।  इसके अलावा दो बड़े स्थानीय चेहरों सर्बानंद सोनोवाल और हिमंता बिस्वा सरमा ने भाजपा को इस बार के चुनाव में सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।  

असम के नतीजों को लेकर मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा है कि असम में रुझानों में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है। हम निश्चित ही फिर से सत्ता में आएंगे। असम में मुख्य उम्मीदवार मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्व सरमा, एजीपी प्रमुख एवं मंत्री अतुल बोरा आदि हैं। इसके अलावा कांग्रेस विधायक दल के प्रमुख देबब्रत साइकिया और उनके सहायक रकीबुल हुसैन भी प्रमुख उम्मीदवार हैं।

बता दें कि असम में पहली बार गैर कांग्रेस सरकार 1978 में बनी थी, जब जनता पार्टी सत्ता में आई।  लेकिन 18 माह में अंदरूनी गुटबाजी के कारण गोलप बोरबोरा की सरकार गिर गई। असमिया आंदोलन को लेकर राज्य में 1985 और 1996 के बीच राज्य में असम गण परिषद की सरकार बनी, लेकिन वो भी लगातार सत्ता में नहीं रही।  वर्ष 2001 से 2016 तक लगातार असम में तरुण गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार रही।  

असम लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे 

असम की 14 लोकसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने सात सीटों पर जीत हासिल की है जबकि कांग्रेस को महज तीन सीटें मिली। वहीं एआईयूडीएफ को तीन सीटें और एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी के खाते में गई। राज्य में कुल 14 लोकसभा सीटों के लिए शुरुआती 3 चरणों में वोट डाले गए थे।


Posted

in

by

Tags:

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *